ग्रहयोग और व्यवसाय निर्धारण

ग्रहयोग और व्यवसाय निर्धारण

सरकारी नौकरी –
सूर्य और चंद्रमा दसवें स्थान में, सूर्य और शनि दशमस्थ होने पर कुछ समस्याओं से जूझने वाला राजकार्य अर्थात सरकारी पद दिलाते हैं। सूर्य और गुरु का दशम भाव में योग न्यायपालिका में उच्च पद प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ होता है।
राजनीतिज्ञ महत्वपूर्ण मंत्री –
उच्च राशि में स्थित ग्रह विशेष रूप से सूर्य व शनि तथा सभी ग्रहों की शुभ भावों में स्थिति। दो-तीन ग्रह स्व राशि में हों या अपनी-अपनी मूल त्रिकोण राशियों में हों। कुंडली में पूर्ण बलवान गज केसरी योग के साथ बली बुध आदित्य योग भी हो। राजनीति का विशेष कारक ग्रह राहु को माना गया है। इसलिए राजनीतिज्ञों की कुंडली में राहु की 3, 6,11 भागों में स्थिति व दशम भाव से संबंध शुभ माना जाता है।
लेखन कार्य –
तृतीय भाव, बुध तथा लेखन के देवता गुरू की युति श्रेष्ठ परिणाम देती है। लेखन कार्य में कल्पनाशक्ति की आवश्यकता रहती है, इसलिए कल्पनाकारक चंद्रमा की शुभ स्थिति भी लाभदायक रहती है।
पत्रकार/ संपादक –
जुझारू पत्रकारिता के युग में मंगल, बुध, गुरु के बल व किसी शुभ भाव में युति के फलस्वरूप पत्रकारिता व संपादन कार्य में सफलता मिलती है। लेखन कार्य के तृतीय भाव के बल की भी जांच करनी चाहिए।
संपादक/इलैट्रॉनिक मीडिया –
इसके लिए मंगल, बुध व गुरु के अतिरिक्त शुक्र्र का महत्व अधिक है तथा भावों में लग्न, द्वितीय व तृतीय तीनों का बली होना चाहिए।
न्यूज रीडर –
न्यूज रीडर के लिए द्वितीय भाव, लग्न, बुध व गुरु बली होने चाहिएं क्योंकि न्यूज रीडर का कार्य एक जगह स्थिर होकर बोलना है इसलिए फोकस्ड और स्थिर होकर बैठने के लिए शनि का भी लग्न अथवा लग्नेश पर प्रभाव जरूरी है।
एंकर –
सफल एंकर बनने के लिए शुक्र, बुध, चंद्रमा व गुरु का महत्व सबसे अधिक रहता है
रेडियो जॉकी –
सफल व कुशल रेडियो जॉकी बनने के लिए जातक की शब्दों पर पकड़ व उच्चारण स्पष्ट होने चाहिएं। तुरंत निर्णय लेकर धाराप्रवाह बोलना व अपनी वाणी में हास्य, व्यंग्य व अभिव्यक्ति की योग्यता उसके कार्य को बल देती है। जिसके लिए बुध, गुरु, चंद्र, वाणी का द्वितीय भाव तथा अभिव्यक्ति के तृतीय भाव के अतिरिक्त कारक राशियों जैसे मिथुन व कन्या का बली होना लाभदायक है। द्वितीयेश, लग्नेश व दशमेश की युति शुभ भाव में हो तथा गुरू की दृष्टि उस पर हो तो भी कुशल रेडियो जॉकी बनने की संभावना अधिक होती है।
सेना / पुलिस-
राशियों में अग्नि तत्व राशियां मेष, सिंह व धनु भावों में लग्न, तृतीय, षष्ठ व दशम भाव तथा ग्रहों में मंगल, सूर्य, राहु, केतु का शुभ व बली होने पर इन क्षेत्रोंं में सफलता की संभावना अधिक होती है।
जल सेना अधिकारी –
इनकी कुंडली में मंगल, सूर्य, दशम भाव के अतिरिक्त चंद्रमा भी बली होता है।
 पायलट –
कुंडली में वायु तत्व राशियां बलवान हों, इन राशियों के स्वामी अधिकतर चर राशियों में स्थित हों तथा द्विस्वभाव राशियों से भी संबंध रखते हों। कुंडली में तीसरा, दशम व अष्टम भाव विशेष बली हो तथा लग्न अग्नि तत्व राशि हो, इसके स्वामी का वायु तत्व राशि से संबंध हो या  वह वायु तत्व राशि में स्थिर है।
कुशल व्यापारी –
कुशल व्यापारी बनने के लिए द्वितीय, एकादश, पंचम व नवम भावों के अतिरिक्त बुध की शुभ स्थिति होनी चाहिए। धनेश व लाभेश का स्थान परिवर्तन योग होना चाहिए। लग्नेश, धनेश व लाभेश की केंद्र में युति, केंद्रों व त्रिकोण के स्थान के स्वामियों का स्थान परिवर्तन योग भी शुभ होता है। व्यापार में स्थायित्व के लिए शनि भी बली होना चाहिए अन्यथा व्यापार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
प्रापर्टी डीलर –
मंगल, शनि व बुध का योग इसके लिए लाभकारी होता है।  मंगल के अशुभ होने पर सांझेदारों में बार-बार झगड़े होते हैं। बली मंगल शुभ ग्रहों के प्रभाव में आने पर इस व्यवसाय में विशेष सफलता का कारक बनता है।
ज्योतिषी –
सफल भविष्यवक्ता के लिए जन्मकुंडली में चंद्रमा, केतु, बुध तथा गुरू के अतिरिक्त द्वितीय व अष्टम भाव का शुभ होने के साथ-साथ जातक के  गंभीर व चिंतनशील होने के लिए लग्न भाव पर शनि का प्रभाव होना चाहिए।
क्रिकेटर / खिलाड़ी –
सफल क्रिकेटर / खिलाड़ी बनने के लिए कन्या लग्न के जातकों की कुंडली में मंगल, बुध, राहु व पंचम भाव के अतिरिक्त शुक्र का बली होना विशेष लाभकारी रहता है।

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