Monday, April 23

जीवन रेखा या आयु रेखा (Life Line in Palmistry)

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जीवन रेखा या आयु रेखा (Life Line in Palmistry)

जीवन रेखा या आयु रेखा हस्त रेखा पद्धति में अंगूठे  के तीसरे पोर को घेरने  वाली रेखा आयु रेखा कहलाती है अगर यह रेखा दोनों हाथों में स्पष्ट रुप से गोला युक्त हो तो आयु का निश्चित प्रमाण भली प्रकार दिया जा सकता है |यहां एक प्रश्न बड़ा काम में आता है कि जीवन  के साथ कर्म ही बुरी तरह जुड़ा  होता है| ऐसी स्थिति में भाग्य को कैसे जाना जाए तो यह जानना  भी आवश्यक हो जाता है कि कर्म दो प्रकार के होते हैं निर्वाह और अनिवार्य | या नहीं इसका निवारण हो सके और दूसरा जो जरूरी है जैसे कभी कभी किसी हाथ में संतान नहीं होने से यह स्पष्ट है कि उस के भाग्य में संतान नहीं है लेकिन किसी प्रकार के अनुष्ठान पूजन या उपाय के द्वारा संतान प्राप्ति हो जाती है भारतीय पर्वतीय पद्धति में किस आयु रेखा को पत्र रेखा भी कहते हैं यह 11 प्रकार की मानी गई है गज रेखा संग ,सं  गुण रेखा  पर गुण रेखा  निर्गुण रेखा , लक्ष्मी सुखभोग दात्री ,कुभ तिवारी सर्व सुखिया रेखा, विनाशिनी रेखा,तथा गौरी और रमा मनुष्य अपने आयु काल में ही भौतिक सुखों और दुखों को भोगता है |यूं ही मनुष्य का जीवन है अगर आयु रेखा ही हस्तरेखा में प्रधान है देखा आयु रेखा जितनी स्पष्ट एवं गोलाई में होगी उतनी ही अच्छी होगी वह व्यक्ति असाधारण रूप से महत्वकांशी कार्यकुशल और यश को प्राप्त करने वाला होता है वह व्यक्ति किसी कार्य में सफलता प्राप्त करेगा यह निर्णय पर्वत की प्रधानता से किया जाता है जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र को सीमित करेगी तो व्यक्ति में सहानुभूति वासनाओं की कमी पाई जाती है जीवन रेखा की लंबाई कम होने से व्यक्ति अल्पायु होता है |

आयु रेखा और मस्तिष्क रेखा

आयु रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनो एक स्थान पर प्रारंभ में मिलती है तो व्यक्ति अपनी शक्ति और उत्साह से कार्य में प्रगति करेगा यह सतत रहेगा पर थोड़ी सी संवेदनशीलता भी होगी (चित्र 01)

यदि आयु रेखा और मस्तिष्क रेखा में शुरू के स्थान परस्पर दूरी होगी तो व्यक्ति में जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास तथा किसी भी विषय पर बोलने की क्षमता होती है दूरी का अर्थ यह है कि 1 इंच का पांचवा या छठा भाग ऐसी हालत में व्यक्ति दूसरों की कम सुनता है और स्वतंत्र विचारधारा का होता है और नौकरी करने में असफल रहता है (चित्र 02)

जीवन रेखा बृहस्पति क्षेत्र से शुरू होने पर व्यक्ति बचपन से ही महत्वकांशी होता है जीवन रेखा हृदय रेखा रेखा का एक साथ जुड़ा होना अत्यंत दुर्भाग्य का सूचक है वह इस बात की सूचना देता है कि बुद्धिहीनता आवेश के कारण व्यक्ति में अवगुण आ जाते है |  (चित्र 03)

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जीवन रेखा जब मध्य में विभाजित होकर उस की शाखा चंद्र क्षेत्र के मूल स्थान को जाती है तो एक अच्छी बनावट के दृढ हाथ का व्यक्ति अस्थिर होता है |उसे यात्राएं ज्यादा पसंद आती है अगर मुलायम हाथ हो शीर्ष रेखा झुकी हो तो व्यक्ति उत्तेजना अवसरों के लिए लालायित रहता है और इस प्रकार की उत्तेजना किसी दुष्कर्म या शराब पीने से शांत होती है|(चित्र 01)

जो रेखाएं जीवन रेखा से निकलकर ऊपर की ओर जाती है वह अधिकारों में वृद्धि आर्थिक लाभ और सफलता की सूचक होती है
अगर ऊपर की ओर जाती हुई रेखा जीवन रेखा से निकलकर सूर्य क्षेत्र की ओर जाए तो व्यक्ति में कुछ विशेष गुण पाए जाते हैं
उपर्युक्त रेखा अगर बुध क्षेत्र की ओर जाए तो व्यापार और विज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है(चित्र 02)

अगर जीवन रेखा अंत में दो शाखाओं में बट जाए और दोनों शाखाओं के बीच की दूरी अधिक हो तो व्यक्ति की मृत्यु अपने जन्म स्थान से अन्य क्षेत्र में होती है |(चित्र 03)

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यदि जीवन रेखा के आरंभ में दीप का चिन्ह तथा वह बीमारी हालत के पश्चात भी बना रहे तो उस व्यक्ति का जन्म रहस्यपूर्ण होता है |
जीवन रेखा पर वर्ग अत्यंत शुभ और सुरक्षा का प्रतीक मन जाता है जीवन रेखा के अनुकूल दिशा में सीधी रेखाएं शुभ और आड़ी तिरछी व काटती हुई रेखाएं अशुभ मानी जाती है |(चित्र 01)

यदि कोई रेखा मंगल पर्वत से ऊपर उठती हुई नीचे आकर जीवन रेखा को काटती है या स्पर्श करती है तो ऐसी रेखा वाली स्त्री का पहले किसी व्यक्ति के साथ अनुचित संबंध रहा था जो उसके लिए संकट का कारण रहा था |(चित्र 02)

यदि जीवन रेखा के भीतर की ओर छोटी रेखा समांतर में चलती है तो उसके जीवन में आने वाला पुरुष और नम्र प्रकृति का होगा(चित्र 03)

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अगर आयु रेखा अंगूठे की जड़ से शुरू होगी तो उस व्यक्ति को संतान की प्राप्ति नहीं होगी |(चित्र 01)

आयु रेखा की शुरुआत में जंजीरनुमा होने से व्यक्ति कार्य के शुरूआत में बुद्धि को इस दिल नहीं रख पाता हर कार्य में उतावलापन होता है इस कारण कभी कभी असफलता का मुंह देखना पड़ता है मन की स्थिति में ही संकुचित हो जाती है|(चित्र 02)

यदि आयु रेखा को प्रारंभ में कोई अन्य रेखा काट रही हो तो दमा संबंधी है या फेफड़े का रोग होता है प्राय सर्दी-जुकाम एवं से संबंधित परेशानियां सामने आती है |(चित्र 03)

शनि पर्वत से कोई रेखा आकर आयु रेखा को काट दे तो पशु द्वारा व्यक्ति को चोट सकती है ऐसे व्यक्ति को पशु संबंधित कार्य करते समय सावधान रहना चाहिए ताकि भविष्य की घटनाओं से सुरक्षा मिल सके |(चित्र 04)

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