Monday, April 23

ज्योतिष योग

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राजयोग

चित्र योग

परिभाषा :यदि द्वितीयेश नवमस्थ हो, नवमेश एकादशस्थ हो और एकादशेश उच्च हो तो चित्र योग का निर्माण होता है.

(ज्योतिष रत्नाकर)

फल:ऐसा जातक बहुत तीछ्ण बुद्धि वाला, अनेक विद्याओं का जानने वाला एवं विळ्ान में प्रवीण होता है.

 राजयोग

चामर योग

परिभाषा :यदि लग्नेश उच्च होकर केन्द्रवर्ती हो और उस पर बृहस्पति की दृष्टि हो तो एक प्रकार का चामर योग निर्मित होता है. पुन: यदि दो शुभग्रह लग्न, सप्तम, नवम अथवा दशम भाव में हों तो दूसरे प्रकार का चामर योग निर्मित होता है.

(ज्योतिष रत्नाकर)

फल:ऐसे योग वाला जातक ग्यानी, दार्शनिक, शास्त्र को जानने वाला, विद्वान, व्याख्याता अथवा राजकुल में उत्पन्न होता है और लगभग 70 वर्ष तक जीवित रहता है.

 राजयोग

चतुश्चक्र योग(कुंभ लग्न)

परिभाषा :मनुष्य के जन्म समय में कुंभ, कन्या, मीन, मिथुन, वृश्चिक, सिंह, धनु और मेष में समस्त ग्रह हों तो चतुश्चक्र योग होता है.

(ज्योतिषतत्तवम् )

फल:इस योग में उत्पन्न जातक सौख्य तथा भोगादि युक्त राजा होता है.

राजयोग

चतुश्चक्र योग(कुंभ लग्न)

परिभाषा :मनुष्य के जन्म समय में कुंभ, कन्या, मीन, मिथुन, वृश्चिक, सिंह, धनु और मेष में समस्त ग्रह हों तो चतुश्चक्र योग होता है.

(ज्योतिषतत्तवम् )

फल:इस योग में उत्पन्न जातक सौख्य तथा भोगादि युक्त राजा होता है.

 राजयोग

चतुर्मुख योग

परिभाषा :यदि लग्नेश व दशमेश केन्द्रगत हों, नवमेश से गुरू केन्द्र में हो और एकादशेेश से शुक्र केन्द्र में हो, तो चतुर्मुख योग की सृष्टि होती है.

फल:जिस जातक की कुण्डली में चतुर्मुख योग होता है वह उच्च विद्या सम्पन्न तथा कई कलाओं का जानकार होता है. इसके साथ ही साथ वह धनी, उच्चपदाधिकारी, विनयशील, गुणवान, चतुर व मृदुभाषी भी होता है.

राजयोग

चन्द्र योग (द्वितीय प्रकार)

परिभाषा :यदि 11 वें घर का स्वामी पांचवें घर में हो और पांचवें घर का स्वामी 11वें घर में हो तथा चौथे घर का स्वामी चन्द्रमा के साथ हो तो चन्द्र योग बनता है.

(ज्योतिष शास्त्र)

फल:इस योग के होने से जातक यशस्वी होता है तथा उसका राजयोग 22 वें वर्ष बाद प्रारम्भ होता है.

 राजयोग

कालनिधि योग

परिभाषा :जन्म कुंडली में दूसरे या पाँचवें भाव में बृहस्पति हो तथा उसके साथ बुध और शुक्र भी हों , या बुध और शुक्र, गुरू को देख रहे हों ,पंचम भाव वृष,तुला,मिथुन या कन्या राशि हो तथा लग्नेश बली हो, तो कालनिधि योग होता है ।

(ज्योतिष योग दीपिका )

फलःऐसा जातक उत्तम स्वभाव वाला, उच्च रहन-सहन को स्वीकार करने वाला तथा उच्च पदाधिकारी होने के साथ -साथ प्रबल भाग्यशाली होता है ।

 राजयोग

कालनिधि योग

परिभाषा :जन्म कुंडली में दूसरे या पाँचवें भाव में बृहस्पति हो तथा उसके साथ बुध और शुक्र भी हों , या बुध और शुक्र, गुरू को देख रहे हों ,पंचम भाव वृष,तुला,मिथुन या कन्या राशि हो तथा लग्नेश बली हो, तो कालनिधि योग होता है ।

(ज्योतिष योग दीपिका )

फलःऐसा जातक उत्तम स्वभाव वाला, उच्च रहन-सहन को स्वीकार करने वाला तथा उच्च पदाधिकारी होने के साथ -साथ प्रबल भाग्यशाली होता है ।
राजयोग

चण्ड योग (तृतीय प्रकार )

परिभाषा :यदि तृतीय स्थान का स्वामी उच्च हो, तृतीय स्थान में बृहस्पति संस्थित हो और वह शुक्र से दृष्ट हो तो ‘चण्ड योग ‘तृतीय प्रकार निर्मित होता है ।

(त्रिफला )

फलःतीसरे प्रकार के ‘चण्ड योग ‘में उत्पन्न जातक का भाग्योदय 13 वें वर्ष की आयु से होता है ।

 राजयोग

चण्ड योग (द्वितीय प्रकार )

परिभाषा :यदि लग्न में उच्च ग्रह हो और तृतीय तथा नवम स्थान के स्वामियों के साथ स्थित हो तथा मंगल से पूर्ण दृष्ट हो तो ‘चण्ड योग ‘की संरचना होती है ।

(त्रिफला )

फलःद्वितीय प्रकार के ‘चण्ड योग ‘के निर्माण की स्थिति में उत्पन्न जातक का भाग्योदय 65 वें वर्ष में होता है ।अर्थात 65 वें वर्ष में धन,यश,कीर्ति, वैभव, सम्पत्ति, समृद्धि आदि सुगमता से प्राप्त करने में जातक सफल होता है ।

राजयोग

चण्ड योग (प्रथम प्रकार )

परिभाषा :यदि राहु दशम स्थान में स्थित हो, दशमेश तृतीय स्थान में शनि के साथ संयुक्त हो तो ‘चण्ड योग ‘की संरचना होती है ।

(त्रिफला )

फलःइस प्रकार के ‘चण्ड योग ‘के निर्माण की स्थिति में उत्पन्न जातक का भाग्योदय 53वें वर्ष में होता है ।अर्थात जातक को 53 वें वर्ष से अपार सफलता, प्रसन्नता, यश,वैभव और समृद्धि आदि उपलब्ध होती है ।

राजयोग

गौरी योग

परिभाषा :यदि दशमेश का नवांशपति दशमस्थ हो, उच्च हो और उसके साथ लग्नेश भी हो तो ऐसे योग को गौरी योग कहते हैं ।

(ज्योतिष रत्नाकर )

फलःजातक 36 से 48 वर्ष की अवस्था तक दानशील, धार्मिक कार्यों में प्रवृत्ति, यज्ञादि क्रिया करने वाला, समस्त सुखों का उपभोग करने वाला विद्वान, ब्राह्मणों से पूज्य और सुविख्यात तथा भूमि का अधिपति भी होता है ।
ऐसा जातक समान्नित परिवार में जन्म लेता है, उसके पास अनेक भूमि होती है, वह धर्मार्थ कार्य करता है ।धार्मिक संस्कार करता है, उसके पुत्र उत्तम आचरण वाले होते हैं और वह एक प्रशंसित व्यक्ति होता है ।

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