Nakshatras (Part-2)

स्वाति नक्षत्र Swati Nakshatra or Nakshatram

स्वाति नक्षत्र राशि पथ में १६६.४० से २००.०० अंशो के मध्य स्थित है इस का दूसरा नाम है मरुत,बात,समीकरण,वायु,|अरबी में इससे अल गफार कहते है |चित्र की तरह स्वाति नक्षत्र में भी केवल एक तारे की स्थिति मणि गयी है |यह नक्षत्र तुला राशि का माना गया है जिसका स्वामी शुक्र देव है |गण देव , योनि महिष और नदी अन्त्य है
चार अक्षर से – रु , रे , रो, ता |
स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातक मांसल देह और आकर्षक व्यक्तितव के होते है |स्वाति में जन्मे लोग शांतिप्रिय खुले विचार वाले और काफी जिद्दी होते है |
खासकर महिलाये |जबकि क्रोध हो जाते है तो संभालना मुश्किल हो जाता है|वैसे ये लोग काफी शांतिप्रिय होते है |स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको का बाल्यकाल समस्याओ से लबालब रहता है |यदपि ऐसे जातक बुद्धिमान कठोर परिश्रमी होते है |
तीस या साठ वर्ष में यह जातक का जीवन काल स्वर्णिम कहा जाता है |

प्रथम चरण में सूर्य
यहाँ सूर्य सामान्य फल देता है शुभ ग्रहहो की दृष्टि ही धनवान बनाती है और विस्द्वन भी बनाती है और सुखी भी बनाती है

दूसरे चरण में सूर्य
यहाँ सूर्य जातक को आभूषण और व्यापर में सफलता देता है |

तीसरे चरण में सूर्य
यहाँ सूर्य सामान्य फल देता है अगर शनि की दृस्टि होतो नेत्र दोष देने वाला होता है |

चौथे चरण में सूर्य
यहाँ पर सूर्य जातक को साहसी बना देता है

 

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