मनोहरा योगिनी साधना Manohara Yogini Sadhna
मनोहरा योगिनी साधना(Manohara Yogini Sadhna)

मनोहरा साधना एक अत्यंत गोपनीय साधना है ज्यादा लोग अभी इसके बारे में जाग्रत नही है |लेकिन प्रथम बार आस्था और अध्यात्म इसको प्रस्तुत कर रहा है |
विधि -नदी किनारे स्नानादि करके नित्य कर्म करके पूर्ववर्त न्यासादि करे |चन्दन का मंडल बनाकर उसके मध्य में देवी का मंत्र लिखकर मनोहरा योगिनी का ध्यान करे .

कुरंगनेत्रां शरदिंदुवक्त्रं विम्बाधरं| चंदनगनधलिप्ताम |
चीनां शूकां पीन कूचा मनोज्ञानं श्याममं सदा काम दुघमन विचित्राम||

अथार्त देवी के नेत्र मृगनयनी के सामान है |शरत कालीन चंद्रमा के सामान मुख सुन्दर है |आधार बिम्बाफल के सामान लाल है |सारा शरीर सुंगंधित चन्दन से अनुलिपित है |चीनी रेशमी वस्त्र है |दोनों स्तन स्थूल और उन्नत है |स्वरूप सुन्दर,वर्ण श्याम है | कामदेहेनु के सामान सभी मनोकामनाओ को पूरण करने वाली है |

ध्यान के बाद साधक को मूल मंत्र से अगर धुप दीप गंध मधु और ताम्बूल से पूजा करे |बाद में देवी का मंत्र जाप करे
मंत्र है -

|| ॐ ह्ल्रीम आगच्छ मनोहर स्वाहा||

एक महीने तक जाप करे रात्रि में २१ माल जाप करे अंतिम दिन प्रातः से रात्रि तक जाप करे
आधी रात तक जाप करने से साधक को दृढ़संकल्प जानकर मनोहरा देवी प्रस्सन होकर प्रत्यक्ष दर्शन देंगी और वर मांगने को कहती है | उस समय देवी को देख कर पाघअदि से पूजन करे |इस योगिनी की पूजा में ह्ल्रीम से प्राणायाम और ह्लां अंगुषठनभ्याम इत्यादि से करांगन्यास करे |

इसके बाद साधक संयत सघोमानस द्वारा बलि प्रदान करे |चंदनोदक और विविध पुष्प फल से मनोहरा की पूजा करे |ऐसा करने से देवी प्रस्सन होकर साधक की अभिलाषा पूर्ण करती है |प्रतिदिन साधक स्वर्ण मुद्रा प्रदान करती है |स्वर्णमुद्रा को प्रतिदिन खर्च कर देना चाहिए क़ुछ भी रखना नही चाहिए वरना देवी नाराज़ हो जाती है और फिर क़ुछ नही देती है| इस साधना में साधक को अपनी पत्नी और स्त्रियों से सहवास नही करना चाहिए |इस साधना के बल से साधक निच्छित होकर सर्वत्र विचरण करने में समर्थ होता है |

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