मातंगी तेल मातंगी साधना (Matangi Sadhna )

मातंगी तेल मातंगी साधना (Matangi Sadhna)

मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान हैं। इनकी साधना सुखमय गृहस्थ, पुरुषार्थ, ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान पति या पत्नी की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इनकी साधना वाममार्गी साधकों में अधिक प्रचलित हैं, किंतु सात्विक लोग भी दक्षिणमार्गी पद्धति से इनकी साधना करते हैं।

यह एक अद्वितीय साधना है “तेल मातंगी” मंत्र साधना,जिसके माध्यम से आप भुत भविष्य वर्त्तमान को देख सकते है।

साधना विधी-विधान

साधना शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस पर रात्री मे 9 बजे प्रारंभ करे। साधना 11 दिन का है और 12 वे दिन चमेली के तेल से 100 माला मंत्र का आहुति भी देना है। इस साधना मे वस्त्र-आसन लाल ही रंग के होने चाहिए। माला रुद्राक्ष का हो और नित्य 100 माला जाप करना पडेगा । साधना काल मे 51 माला के बाद आप आराम कर सकते है परंतु उसके बाद बाकी मंत्र जाप करना होगा। मंत्र जाप के समय एक ताम्बे के कटोरे मे चमेली का तेल भरकर सामने रखना है और मंत्र जाप करते समय कटोरे मे भरकर रखे हुए तेल के तरफ देखकर जाप करें। तो कुछ दिनो बाद तेल मे मातंगी जी का चेहरा दिखाई देगा,उसके बाद जब मातंगी जी पुर्ण रुप मे दिखाई दे देने लग जाये तो साधना पूरी हुई

यन्त्र

निम्न यन्त्र को भोजपत्र पर बना कर केशर और अस्तगंध से या फिर कमल के पत्ते पर बनाये

मंत्रः-

।। ॐ ह्रीं क्लीं हूं तैलं मातंग्यै इच्छितं दर्शय दर्शय फट् स्वाहा।

om hreem kleem hoom teilam maatangyei darshay darshay phat swaahaa 

साधना मे जो तेल इस्तेमाल किया हो उसे किसी कांच के बोटल मे सम्भालकर रखे,वह तेल प्रयोग करते समय काम मे आयेगा। हो सके तो साधना मे पुर्ण सफलता हेतु तेल मातंगी यंत्र को गले मे धारण करे ।

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