Ganesh Chaturthi 2018: Know The Puja Vidhi, Tithi And Timings
हरिद्रागणेशमन्त्रा:

पञ्चान्तको धरासंस्थो विन्दुभूषितमस्तक:  ।     एकाक्षरो     महामन्त्र:  सर्वकामफलप्रद:।।अस्य वसिष्ठ ऋषिर्गायत्रीच्छन्दो हरिद्रागणपतिर्देवता गकारो बीजं लकार: शक्ति: । बीजेनैव षडग्ङकम्।

 

ऋष्यादि न्यास- इस मन्त्र के ऋषि वशिष्ठ, छन्द गायत्री, देवता हरिद्रा गणेश, बीज ‘ग’ और शक्ति ‘ल’ है।

करन्यास- गां अंगुष्ठाभ्यां नम:। गीं तर्जनीभ्यां नम:। गूं मध्यमाभ्यां नम:। गैं अनामिकाभ्यां नम:। गौं कनिष्ठाभ्यां नम:। ग: करतलकरपृष्ठाभ्यां नम:।

षडंगन्यास– गां ह्रदयाय नम: । गीं शिरसे स्वाहा । गूं शिखायै वषट्। गैं कवचाय हुं। गौं नेत्रत्रयाय वौषट । ग: अस्त्राय फट्।

इनका ध्यान इस प्रकार करे-

ध्यानन्तु-       हरिद्राभं   चतुर्बाहुं  हारिद्रवसनं  विभुम्।पाशांकुशधरं  देवं  मोदकं दन्तमेव च।। हरिद्रागणेशमन्त्र- हरिद्रा गणेश का मन्त्र ‘ग्लं’ एकाक्षर है। यह सर्वार्थसिध्दिदायक है। इसका यन्त्र गणेश यन्त्र के समान है।

हरिद्राभं    चतुर्बा……………..           हल्दी जैसा पीला वर्ण, चार भुजाएँ, हल्दी के रंग के वस्त्र, हाथों में पाश, अंकुश, वर, मोदक और दन्त धारण करने वाले प्रभुत्वशाली भगवान् हरिद्रा गणेश का मैं ध्यान करता हूँ।      इसके बाद मानसोपचारों से पूजन करके शंखस्थापन करे। तीव्रादि पीठशक्तियों और पीठ की पूजा करके ध्यान-आवाहनादि सहित एकाक्षर गणेशमन्त्रोक पूजा के समान पूजन करे। चार लाख जप से इसका पुरश्चरण होता है। घी-मधु-शक्कर और हल्दीचूर्णमिश्रित चावल से हवन होता है।

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