मंगल चंडिका स्त्रोत

महा संतोषी साधना


संतोषी माँ की साधना अपने आप में ही संतोष प्रदान करती है |इसको सिद्ध करने मात्र से ही साधक अपने आप में संतोषपूर्ण हो जाता है आस्था और अध्यात्म पहली बार इस साधना का वर्णन कर रहा है|इस साधना के ज्यादा नियम तो नही है पर फिर भी इस साधना को वही लोग और साधक सिद्ध करे जिनको गुरु की दीक्षा प्राप्त हुई हो क्योंकि साधना में सिद्धि तो प्राप्त गुरु के द्वारा ही हो पायेगी क्योंकि संतोषी माँ जितनी शांत और निर्मल है उतनी ही ज्यादा क्रोध करने वाली भी है इसलिए साधना में गलती न हो इस बात का ध्यान रखे|प्रथम तो उपासनाजनितशक्ति ही प्राप्त नहीं होती और किसी कारणवश थोडी बहुत सफलता प्राप्त हो गई तो वह शीघ्र ही नष्ट हो जाती है और आगे के लिए रास्ता बंद हो जाता है। देवी शक्तियां कभी किसी अयोग्य व्यक्ति को ऐसी साम‌र्थ्य प्रदान नहीं कर सकती, जिससे वह दूसरों का अनिष्ट करने लग जाए।

सामग्री


पीली धोती या कपडा (कोरा),तुसली या रुद्राक्ष की माला,देसी घी,दीपक,करवा,गंगा जल,सफ़ेद चन्दन,भोजपत्र.अष्ट गंध,संतोषी यन्त्र,पीला या लाल आसन,कलावा

दिन तिथि वार


 दिन शुक्रवार (शुक्लपक्ष) 

सर्व प्रथम गुरु दीक्षा लेकर गणेश पूजन करे निम्न मंत्र से गणेश जी की एक माला जाप करे करे और गणेश जी को पंचमोली (कलावा) बांध दे और लड्डू का भोग लगा देवे

“गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।”

(चार बार जाप करे )

गंगा जल को दहिने हाथ में लेकर निम्न मंत्र को पड़े और जल को छिडक दे इससे आपकी सीधी होती है
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतो5पि वा ।
यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।।”
फिर आसन को शुद्ध करे

फिर निम्न मंत्र का उच्चारण करे

“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ .
निर्विघ्नं कुरु में देवा सर्व -कार्येशु सर्वदा .”

गुरु पूजन 


गुरु का ध्यान करते हुए निम्न मंत्र की एक माला जाप करे और गुरु से प्राथना करे


“हे आपकी आज्ञा अनुसार में संतोषी साधना करने जा रहा हू आज्ञा प्रदान करे”

“गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु
गुरुर देवो महेश्वरः
गुरु साक्षात परब्रह्म
तस्मै श्री गुरुवे नमः”

यन्त्र 


फिर अनार या तुसली की कलम से निम्न यन्त्र का निर्माण करे भोजपत्र पर और अष्ठगंध को गंगा जल में मिलकर स्याही बना करे लिखे|

यन्त्र को बनाकर आम की लकड़ी की  चौकी पर रखे और पूजन करे |यन्त्र को बनाकर आम की लकड़ी की  चौकी पर रखे और पूजन करे |पूजन में यन्त्र को धुप दीप दे और दीपक जलाये उसी चौकी पर और सुंगधित धुप भी जलाये|


और फिर निम्न मंत्र की ५ माला जाप करे और जाप खत्म होने के बाद उसी आसन पर सो जाये|

“ॐ नमो संतोसी माई |सत की सदा  सहाई |बाबा गणपति की बेटडि|

रिधि सिद्धि की जाई |भक्तो को बक्शे संतुष्टि|नाम संतोसी कहलायी |दुःख हरो सुख करो |

सर पर मेहर का हाथ धरो |माई तेरी महिमा अपरंपार |तोहे बारम्बार नमस्कार |

चले मंत्र फुरो वाचा |देखु माता संतोसी तेरे इल्म का तमाशा”

११दिन पुरे होने के बाद यन्त्र को किसी नदी में बहा दे और यह मंत्र बोले

 

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन ।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे ।।

नियम
१.तामसिक भोजन त्याद दे
२.भरमचर्ये रखे
3.झूट न बोले
4.खट्टा चीज़े न खाये

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