Temples of Lord Shani

२५ मई को शनि जयंती,कैसे करे पूजन

२५ मई २०१७ को शनि जयन्ती है और गुरु गौरव आर्य ने बताया  की 25 मई को शनि जयंती है और इस दिन शनि की विशेष पूजा करने से कुंडली के सभी दोष दूर हो सकते हैंऔर साथ ही जिन पर साढ़े साती चल रही है उनके लिए भी यह काफी अच्छा माना गया है |जो शनि साधना कर रहे है वो काफी २५ मई को शनि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है|जिनको नौकरी आदि में ज्यादा समस्या आ रही है |वो विशेष पूजन कर समस्या का समाधान कर सकते है साथ ही मकर ,वृश्चिक,धनु,पर साढ़े सती चल रही है और वृष कन्या पर ढैया चल रही है |अगर ढैया या साढ़े सती के कारण कोई भी समस्या आ रही हो तो इस दिन विशेष पूजन करके भगवान शनि का आशीर्वाद प्राप्त किया का सकता है | शनि एक संस्कृत शब्द है शनये कमति सः जिसका अर्थ है अत्यन्त धीमा जिस कारण शनि की गति की बहुत धीमी है।शनि की गति भले ही धीमी हो पर शनि देव को बहुत की सौम्य देव मान जाता है । शनि देव सूर्य देव पुत्र होने के कारण बहुत ही शक्तिशाली है जिस कारण शनि देव का तेज़ और शक्ति भी देवताओ में अद्भुतिय   है शनि देव अत्यधिक क्रोधी एवं नटखट भी है जिस कारण मानवों और देवताओ में शनि देव का डर व्याप्त  है ।भगवान शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है क्योंकि शनि देव पाप करने वालो को और अन्याय करने वालो को अपनी दशा या अंतर दशा में दण्डित करते है शनि देव ऐसा इसलिए करते है ताकि वह प्रकृति के नियम को बनाए रखे और प्रकृति का संतुलन बन रहे एक प्रकार से  शनि देव संतुलन बनने का कार्य करते है|

किस प्रकार से शनि देव का पूजन किया जा सकता है उसकी विधि इस प्रकार है |

शनि देव को जल से स्नान कराये और निम्न मंत्र पढ़े

शनि देवाये स्नानमं समर्पयामि |

शनि देव को चन्दन लगते हुए निम्न मंत्र को पढ़े |

भो शनिदेवः चन्दनं दिव्यं गन्धादय सुमनोहरम् |

विलेपन छायात्मजः चन्दनं प्रति गृहयन्ताम् ||

भगवान शनिदेव की पूजा में इस मंत्र का जाप करते हुए उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए|

शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |

अर्घ्यं फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को प्रज्वलीत दीप समर्पण करना चाहिए-

साज्यं वर्तिसन्युक्तं वह्निना योजितं मया |

दीपं गृहाण देवेशं त्रेलोक्य तिमिरा पहम्. भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान शनिदेव को यज्ञोपवित समर्पण करना चाहिए और उनके मस्तक पर काला चन्दन (काजल अथवा यज्ञ भस्म) लगाना चाहिए-

परमेश्वरः नर्वाभस्तन्तु भिर्युक्तं त्रिगुनं देवता मयम् |

उप वीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को पुष्पमाला समर्पण करना चाहिए-

नील कमल सुगन्धीनि माल्यादीनि वै प्रभो |

मयाहृतानि पुष्पाणि गृहयन्तां पूजनाय भो ||

भगवान शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करते हुए उन्हें वस्त्र समर्पण करना चाहिए-

शनिदेवः शीतवातोष्ण संत्राणं लज्जायां रक्षणं परम् |

देवलंकारणम् वस्त्र भत: शान्ति प्रयच्छ में ||

शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सरसों के तेल से स्नान कराना चाहिए-

भो शनिदेवः सरसों तैल वासित स्निगधता |

हेतु तुभ्यं-प्रतिगृहयन्ताम् ||

सूर्यदेव पुत्र भगवान श्री शनिदेव की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करते हुए पाद्य जल अर्पण करना चाहिए-

सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धदिभिर्युतम् |

अनिष्ट हर्त्ता गृहाणेदं भगवन शनि देवताः ||

भगवान शनिदेव की पूजा में इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-

विचित्र रत्न खचित दिव्यास्तरण संयुक्तम् |

स्वर्ण सिंहासन चारू गृहीष्व शनिदेव पूजितः ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान श्री शनिदेव का आवाहन करना चाहिए-

नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |

चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी ||

फिर शनि देव का पथ जैसे चालीसा आरती आदि करके शनि देव को नमन करना चाहिए |और अपनी गलतियों के लिए क्षमा लेनी चाहिए |

शनि देव का पूजन करते समय उनके सामने खड़े होकर पूजन नहीं करना चाहिए और प्लास्टिक या पालीथीन आदि से शनि देव को तेल नहीं चढ़ना चाहिए और मंदिर में या पूजन स्थान में गंदगी नहीं करनी चाहिए |यह पूजन घर में भी नहीं करना चाहिए | प्रसाद के रूप में काली  खिचड़ी आदि बाँट सकते है या कुत्ते को तेल लगी रोटी खिला सकते है

गुरु गौरव आर्य (ज्योतिर्विदचर्या)

 

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